आपसे किस ने काहा बिजली गिरानेके लिए
हात थक जाएङ्गे क्यूँ पिस रहे ओ मेहदी
खुन हाँजिर हे हथेली पर लानेके लिए
ईश्क को दर्द इ सारे कहेने वालो सुनो
कुछ भि हो हमे ए दर्द इ सारे ले लिए
ओ निगाहो से बचकर कहाँ जाएङ्गे
अब तो उन्के महल्लेमे घर ले लिए
आए अन्थन्के सेहेरे खामोस मेँ ओ
कबर्र देखी जो मेरी तो केहेने लगे
अरे आज इतनि तो उस कि तरक्कि हाभी
एक बार घर ने अच्छा से घर ले लिए
इधर जिन्दगीका जनाजा उठे गा
उधर जिन्दगीकी दुल्हन बने गी
कयामत से पहेले कयामत हे यारोँ
मरे सामने मेरी दुल्हन उठेगी
इधर जिन्दगीका
जवानी पे मेरी सितम धाने बालोँ
जरा सोच लो क्या कहेगा जमाना
इधर मेरे अरमान कफन पहेनलेङ्गे
उधर उन्की हाथोँपे मेहन्दी गलेगी
अजल से मोहबतकी दुस्मन हे दुनिया
कहीँ दो दीलोको मिल्ने न देगी
इधर मेरे दिल पर खन्जर चलेगा
उधर उन्के माथेपर बिन्दीया सजेगी
मेरी मौत परियोके झुरमत मे हो गी
जनाजा हाँसिनो के कन्धेपे हो गा
कफन मेरा हो गा उन्ही का दुपठ्ठा
बढी ढुम से मेरी मैयत उठे गी
इधर जिन्दगीका जनाजा उठेगा
इधर जिन्दगी उन्की दुल्हन बनेगी
singer..............attaullah khan niazi
music...............attaullah khan niazi
lyrics.................tabash
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